ध्रांगधरा में अगस्त 3, 2027 - मंगलवार को राहु काल - यमगंडम, गुलिक काल, सूर्योदय और सूर्यास्त समय

क्या आप अगस्त 3, 2027 - मंगलवार को कुछ विशेष करने जा रहे हैं? ध्रांगधरा के लिए राहु काल, यमगंडम और गुलिक काल समय पहले से जान लें। इन समयों में कार्य शुरू करने से बचना बेहतर माना जाता है।

राहु काल / राहु काल समय

अगस्त 3, 2027 - मंगलवार - ध्रांगधरा बदलें

राहु काल समय

04:09 PM 05:48 PM

अवधि

99 मिनट
यमगंडम
09:33 AM 11:12 AM
अवधि: 99 मिनट
गुलिक काल
12:51 PM 02:30 PM
अवधि: 99 मिनट
सूर्योदय और सूर्यास्त (ध्रांगधरा)
सूर्योदय: 06:15 AM
सूर्यास्त: 07:24 PM
सौर मध्याह्न: 12:00 AM
दिन की अवधि:

चौघड़िया के लिए ध्रांगधरा - अगस्त 3, 2027 - मंगलवार

नाम प्रारंभ समाप्ति शुभ समय
काल (अशुभ) 06:15 AM 07:53 AM नहीं
शुभ (मंगलकारी) 07:53 AM 09:32 AM हाँ
अमृत (अमृत समय) 09:32 AM 11:10 AM हाँ
चल (गतिशील) 11:10 AM 12:49 PM हाँ
रोग (बीमारी) 12:49 PM 02:28 PM नहीं
उद्वेग (चिंता) 02:28 PM 04:06 PM नहीं
लाभ (फायदा) 04:06 PM 05:45 PM हाँ
काल (अशुभ) 05:45 PM 07:24 PM नहीं

राहु काल - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगस्त 3, 2027 - मंगलवार को ध्रांगधरा में राहु काल का समय क्या है?

अगस्त 3, 2027 - मंगलवार को ध्रांगधरा में राहु काल 04:09 PM से 05:48 PM तक है। यह समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से निर्धारित किया गया है। कृपया इस अवधि में कोई नया कार्य शुरू न करें।

राहु काल (Rahu Kaal) की गणना कैसे होती है?

हर स्थान के सूर्योदय समय के अनुसार, सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। सप्ताह के हर दिन एक अलग भाग राहु को सौंपा जाता है। हमारी वेबसाइट सटीक अक्षांश, देशांतर, सूर्योदय और सूर्यास्त की जानकारी लेकर सही समय तय करती है।

क्या राहु काल हर जगह एक ही समय पर होता है?

नहीं, राहु काल हर स्थान पर अलग होता है क्योंकि इसकी गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार होती है। मौसम और शहर बदलने से इसका समय भी बदलता है।

राहु काल और यमगंडम में क्या अंतर है?

दोनों समय दैनिक रूप से अशुभ माने जाते हैं। राहु काल ग्रह राहु से जुड़ा होता है, जबकि यमगंडम यम से संबंधित है। दोनों समय में नए कार्यों की शुरुआत से बचा जाता है।

राहु और राहु काल के बारे में और अधिक पढ़ने के लिए हमारे FAQ पेज पर इस लिंक पर क्लिक करें: राहु काल - प्रश्नोत्तर